फर्रुखाबाद, लखनऊ,आगरा

सांसद सुब्रत पाठक व साथियों पर संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत
कन्नौज। भाजपा राज में गुण्डागर्दी करने वाले सांसद सुब्रत पाठक व उनके साथियों के खिलाफ जान-माल, जातिसूचक गालियों के साथ तहसीलदार सदर से उनके सरकारी आवास में घुसकर समर्थकों सहित मार-पीट के मामले में शासन के सख्त रुख अख्तियार करने के चलते कोतवाली पुलिस ने संगीन धाराओं में सांसद सहित 3 नामजद और 20 से 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है। 
दी गई तहरीर में तहसीलदार सदर अरविन्द कुमार पुत्र स्व. रामलाल निवासी ग्राम कमईपुर थाना होलागढ़ प्रयागराज ने कोतवाली निरीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि 7 अप्रैल को वह अपने तहसील कार्यालय में कोरोना के दृष्टिगत आपदा राहत सम्बन्धी महत्वपूर्ण कार्य निपटा रहे थे तभी अपरान्ह पौन एक बजे उनके सीयूजी फोन पर सांसद सुब्रत पाठक द्वारा जातिसूचक गालियां दी गईं व उनके द्वारा भेजी गई सूची के लोगों को राहत सामग्री का वितरण कराने का दबाव बनाया गया। यह भी धमकी दी गई कि वह उन्हें मारने के लिए तहसील आ रहे हैं। इसके बाद तहसील के अमीन संजय शुक्ल द्वारा उन्हें बताया गया कि सांसद अपने समर्थकों के साथ तहसील की ओर आ रहे हैं। उस समय वह क्षेत्रीय भ्रमण पर जाने वाले थे। विवाद से बचने के लिए वह अपने राजकीय आवास में चले गये तभी अचानक सांसद और उनके 20 से 25 लोग उनके घर में घुस आये। जातिसूचक गालियां देकर उनके पर लाठी-डंडों व लात-घूंसों से हमला बोल दिया। उनके चिल्लाने पर तहसील के कर्मचारी रामवरन, लेखपाल अमित राय, बचाने आये। उनके साथ भी मार-पीट की गई जिससे दोनों लेखपाल व वह गंभीर रूप से घायल हो गये। जिसके बाद वह राहत कार्य के लिए नहीं जा सके। पुलिस ने तहसीलदार सदर की तहरीर पर सांसद सुब्रत पाठक पुत्र स्व. ओमप्रकाश पाठक निवासी पठकाना व उनके साथी सचिन शर्मा, सौरभ कटियार, शिवेन्द्र सिंह समेत 20-25 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 452, 332, 353, 504, 506, 269, 270, 188 व अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम  3 ;1द्ध ;दद्ध भादवि के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। तहसीलदार ने कहा कि वर्तमान में लागू लॉक डाउन व धारा 144 का भी उल्लंघन किया गया है। सांसद के इस कृत्य कोविड-19 जैसी महामारी के संक्रमण के बढऩे का भी खतरा उत्पन्न हुआ है।


राष्ट्रवाद: डीएम फर्रुखाबाद अपने वेतन का 20 फीसदी दो साल तक सीएम राहत कोष में देंगे
फर्रुखाबाद।कोविड-19 महामारी से जूझ रहे देश और दिन-रात बचाव में लगी सरकार का साथ देने के लिए आईएएस प्रोन्नत मंच के अध्यक्ष व डीएम फर्रुखाबाद मानवेन्द्र सिंह ने मिसाल पेश करते हुए अद्भुत व अनूठी शुरूआत की है। वह व उनके संघ के महासचिव निदेशक उत्तर प्रदेश सूडा उमेश प्रताप सिंह अगले दो वर्षों तक मुख्यमंत्री राहत कोष में अपने वेतन का 20 फीसदी अंश सहयोग राशि के रूप में देंगे। 
आईएएस प्रोन्नत संघ यूपी के अध्यक्ष व जिलाधिकारी फर्रुखाबाद मानवेन्द्र सिंह ने अपने साथ अन्य साथी अधिकारियों से भी अपील की है कि वह अपनी स्वेच्छा से अपने वेतन कटौती के सम्बन्ध में विचार कर मुख्यमंत्री राहत कोष में सहयोग करना चाहें।
बता दें कि बतौर जिलाधिकारी आईएएस मानवेन्द्र सिंह इन दिनों जिलाधिकारी के रूप में जिला फर्रुखाबाद में कोरोना की महामारी से निपटने के लिए पूरी ताकत झोंके हैं। वह प्रशासनिक मशीनरी के साथ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। खुद तपती धूप में कम्युनिटी किचन से लेकर कोविड हॉस्पिटल और अस्पतालों का न केवल जायजा लेते हैं बल्कि जनता के बीच जाकर भी जन जागरण करते हैं। उनकी इस मुहिम में उनकी समाजसेविका धर्मपत्नी श्रीमती मंजू सिंह भी कंधे से कंधा मिलाकर लोगों की दिल खोलकर मदद कर रही हैं।  


अब राहत सामग्री लेते समय फोटो नहीं खिचवायेंगे पीआरबी एस जवान
लखनऊ। अधिकांश लोग जरूरत होने के बाद भी फोटो खींचने और इसके सार्वजनिक होने के डर से राहत सामग्री नहीं ले रहे हैं। इस बात को डायल 112 के अपर पुलिस महानिदेशक असीम अरुण ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने सभी पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश देते हुए कहा कि पीआरबी एस द्वारा जो भी राहत सामग्री दी जाएगी। उसका न तो फोटो खींचा जाएगा और न ही वायरल किया जाएगा। 
अपर पुलिस महानिदेशक असीम अरुण ने कहा कि पीआरबी एस लॉक डाउन के कारण जरूरतमंद लोगों को राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रही है जिसमें राशन सामग्री प्राप्त करने वाले का फोटो खींचा जाता है और इस तरह के फोटो सोशल मीडिया तक पहुंच जाते हैं। अपना चेहरा सार्वजनिक होने के डर से जरूरतमंद लोग राहत सामग्री प्राप्त करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निज मर्यादा के दृष्टिगत यह स्वाभाविक भी है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को दिए आदेश में कहा कि अपने-अपने जनपदों में संचालित पीआरबी एस को राहत सामग्री देते हुए फोटो न खींचे जाने तथा इस प्रकार के फोटो सोशल एप्पस पर पोस्ट न करने के निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
जमातियों ने आगरा मंडल को किया संक्रमित, मैनपुरी समेत पूरे मंडल में अब 79 पॉजिटिव
आगरा। कोरोना वायरस की चपेट में अब पूरा आगरा मंडल आ गया है। मंडल भर में कोरोना के 79 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें आठ मरीज ठीक भी हो गए हैं। ये सभी आगरा के रहने वाले हैं, जो मार्च महीने में संक्रमित पाए गए थे। अप्रैल के पहले सप्ताह में इन संक्रमितों में सबसे ज्यादा जमाती हैं, जो दिल्ली व अन्य शहरों से आए हैं। 
आगरा में मंगलवार को आए 10 और बुधवार सुबह दो मामलों के बाद संक्रमितों की कुल संख्या 65 हो गई है। इनमें मार्च में 11 और अप्रैल के आठ दिनों में 54 लोग पॉजिटिव मिले हैं। मंगलवार को संक्रमित 10 मरीजों में से 17 साल का किशोर और 18 साल का युवक भी है। इनमें ज्यादातर जमाती और इनके संपर्क में आए लोग हैं। संक्रमित मरीजों का इलाज सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में चल रहा है। 
दिल्ली से आए जमातियों ने मंडल के बाकी तीन जिलों की चिंता भी बढ़ा दी है। मथुरा में सोमवार को दो लोग संक्रमित मिले। इनमें एक शामली जनपद का रहने वाला जमाती है। दूसरी महिला है, जो आगरा निवासी है। उसका यहां एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। कोरोना के मरीज मिलने के बाद मथुरा के कई इलाके सील कर दिए गए हैं।  
फिरोजाबाद में संक्रमितों की संख्या 9 हो गई है। मंगलवार को 5 और लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। ये लोग उन चार संक्रमित जमातियों के संपर्क में आए थे, जो दिल्ली से आए हैं। ये चारों जमाती बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं। जहां-जहां ये जमाती ठहरे थे, उन इलाकों को सैनिटाइज किया गया है।  
मैनपुरी जिले के कस्बा घिरोर में मिले जिन चार जमातियों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पॉजिटव आई थी। उनमें तीन संक्रमित मिले हैं, जबकि एक की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इन सभी के सैंपल जांच के लिए दोबारा भेजे गए थे। मंगलवार को इसकी रिपोर्ट प्रशासन को मिली। ये सभी जमाती शामली जनपद के रहने वाले हैं। 2 मार्च को मैनपुरी आए। इस दौरान अलग-अलग मस्जिदों में रुके।


कैसे न करें कोटेदार घटतौली जब गल्ला गोदाम से ही कम मिलती है राशन की खुराक
फर्रूखाबाद। कोविड-19 महामारी के खतरे से जूझ रहे प्रशासन के जिम्मेदार भले ही गरीब का निवाला पहुंचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हों लेकिन खाद्य एवं रसद विभाग अपने पुराने ढर्रे को बदलने के लिए इस महामारी की जंग में भी तैयार नहीं है। सरकारी सस्ते गल्ले की गोदाम से कोटेदार को ही राशन घटतौली कर मिलेगा तो वह प्रति यूनिट उस राशन को कैसे पहुंचायेगा। बिगड़ी व्यवस्था जनमानस के लिए चुनौती का सबब है। 
गल्ला गोदाम से गेहूं की बोरी साढ़े इक्यावन किलो और चावल की बोरी इक्यावन किलो निर्गत करने को नियत है लेकिन कोटेदार को गेहूं की बोरी 46 से 47 किलो और चावल 44 से 45 किलो ही कोटेदारों तक पहुंच रहा है। ऐसे में कोटेदार प्रति यूनिट 5 किलो की भरपाई कैसे करे ? महामारी का दौर है। सभी को राशन देना है। अगर कोटेदार व्यवस्था में जुगाड़ से काम नहीं करेगा तो आखिर वह हर किसी का निवाला कैसे उस तक पहुंचायेगा?  पिछले लम्बे समय से कोटेदार मांग करते आ रहे कि उन्हें राशन धर्मकांटे से तौल कर दिया जाये और उसकी रसीद भी प्राप्त कराई जाये लेकिन उनकी यह मांग आज तक अनसुनी रही। सरकार ने कोटेदारों की घटतौली और रास्ते में सरकारी अनाज की बिक्री को रोकने के लिए सतर्कता अपनाते हुए कोटेदारों को दुकान तक राशन पहुंचाने का जिम्मा अपने सिर लिया था। व्यवस्था भी हुई लेकिन खाद्य एवं रसद विभाग के जिम्मेदार अपनी कारगुजारियों को बदलने को तैयार नहीं हैं। जब इलेक्ट्रानिक मशीन से फिंगर प्रिंट के बाद उपभोक्ता को राशन दिया जाने लगा है उसके बावजूद पूर्ति निरीक्षक कोटा वितरण रजिस्टर के पन्नों की गिनती प्रमाणित करने के खेल में मनमानी करते हैं। जब इलेक्ट्रानिक मशीन से राशन का वितरण शुरू हो गया है तो रजिस्टर प्रमाणित करने की जरूरत कहां से आ पड़ी। 
कमालगंज सरकारी सस्ते गल्ले की हाट गोदाम से जुड़े कोटेदारों ने राशन कम  मिलने पर रोष व्यक्त किया जिस पर मार्केटिंग इंस्पेक्टर रामनरेश यादव ने उन्हें खुश करने के लिए सामने तो चार-पांच बोरी की तौल करा दी लेकिन लदान वाली बोरियां पूर्ववत रहीं। मार्केटिंग इंस्पेक्टर यह बताने से गुरेज नहीं करते हैं कि धर्मकांटा खराब है। लिखित शिकायत डीएसओ से की गई है तो डीएसओ यह कहते देर नहीं लगाते कि घटतौली की व्यवस्था से जिलाधिकारी को अवगत कराया गया है। व्यवस्था में और पारदर्शिता शीघ्र दिखेगी। 
कुछ कोटेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खाद्य एवं रसद विभाग की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही। मांग की कि जिले के तेज-तर्रार जिलाधिकारी यदि चाहें तो उनकी राशन की दुकानों की बोरियों की तौल करा लें और फिर गोदामों में रखी बोरियों की तौल करा लें। हकीकत खुद ब खुद सामने आ जायेगी कि सही कौन है और गलत कौन ?


बोले डीएसओ अब तक आठ दुकानों पर की जा चुकी कार्रवाई
फर्रुखाबाद। सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली पर लगातार सख्त रुख अपनाये जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह के निर्देश पर डीएसओ ने अब तक जिले की आठ सरकारी राशन की दुकानों को निलंबित किया है। डीएसओ ने बताया कि अब तक दो कोटेदारों के विरू( मुकदमा भी पंजीकृत कराया जा चुका है। 
जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने साफ कहा है कि जनता को मिलने वाले खाद्यान्न पर किसी भी प्रकार की लापरवाही और घटतौली बर्दाश्त नहीं है। जो भी इस मामले में लापरवाही करेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होते देर नहीं लगेगी। उन्होंने गल्ला गोदामों की बदहाल व्यवस्था का संज्ञान लेकर जिम्मेदारों को कड़े निर्देश दिये हैं और कहा है कि कोई भी अनाज से वंचित न रहे। बता दें कि राशन वितरण प्रणाली पर जिला पूर्ति अधिकारी जीवेश कुमार पूरी तरह उदासीन हैं। जिसके चलते उनके विभाग के कर्मचारियों को कोई खौफ नहीं बचा है।